कस्वा ,कसवा .कुसवा,कुशवा,कुसवान गोत्र का इतिहास
कसवा गोत्र का इतिहास कस्वा ,कसवा .कुसवा,कुशवा,कुसवान गोत्र का इतिहास कस्वा ,कसवा .कुसवा,कुशवा,कुसवान एक ही गोत्र है यह गोत्र राजस्थान ,हरियाणा ,पंजाब,उत्तर प्रदेश में निवास करता है कसवा गोत्र के जाटो की उत्त्पतिके बारे में माना जाते है की यह भगवान श्री रामचं द्र के पुत्र कुश के वंशज है जबकि कुछ इतिहासकार इनको कुषाण वंशी मानते है ठाकुर देशराज मानते हैं यह यदुवंशी जाट है कि आरम्भ में यह सिन्ध में राज्य करते थे । ईसा की चौथी सदी से पहले जांगल-प्रदेश में आबाद हुए थे। इनके अधिकार में लगभग चार सौ गांव थेसीधमुख राजगढ़ तहसील में चुरू से 45 मील उत्तर-पूर्व में बेणीवालों की राजधानी रायसलानासे 18 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है. कर्नल टाड ने यद्यपि जाटों की कसवा शाखा का उल्लेख जाटों के प्रमुख ठिकानों में नहीं किया है लेकिन दयालदास, पाऊलेट, मुंशी सोहन लाल आदि ने कसवा जाटों को प्रमुख ठिकानों में गिना है . उनके अनुसार कसवां जाटों का प्रमुख ठिकाना सीधमुख था और राठोडों के आगमन के समय कसवां कंवारपल उनका मुखिया था तथा 400 गाँवों पर उसकी सत्ता थीकसवां जाटों के भाटों तथा उनके पुरोहित दाहिमा ब्रह...