अब छिड़ी 5G की जंग, Jio से लेकर Vodafone तक, सबने मांगी सरकार से मदद
पहले 4G को लेकर एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया के बीच तगड़ा मुकाबला देखा गया. अब ऐसी ही स्थिति 5G को लेकर दिख रही है. इस मामले में सभी कंपनियों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है.
कंपनियों का कहना है कि 5जी टेक्नोलॉजी को लोगों की पहुंच में बनाए रखने के लिए सरकार को टैक्स में कमी करने की जरूरत है. कंपनियों ने देश में तेजी से इसके फैलाव के लिए करोड़ो डॉलर का निवेश किया है. दुनिया के किसी भी देश में इतनी तेजी से 5जी का विस्तार नहीं हुआ हैं, वहीं इस नई टेक्नोलॉजी से भविष्य में अतिरिक्त कमाई को लेकर कोई स्पष्ट रुपरेखा नहीं है.
लाइसेंस के लिए 1% फीस की गुजारिश
टेलीकॉम कंपनियों के संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) का कहना है कि लाइसेंस फीस को 3 प्रतिशत से 1 प्रतिशत पर लाया जाना चाहिए. इतना ही नहीं ‘यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन’ की मद में लगने वाले 5 प्रतिशत टैक्स को तब तक के लिए टाल देना चाहिए, जब तक कि इस फंड में पड़े 64,774 करोड़ रुपये इस्तेमाल नहीं हो जाते.
रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक टेलीकॉम इंडस्ट्री का वित्त वर्ष 2022-23 में कुल कर्ज 6.3 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है. सीओएआई के महानिदेशक एस. पी. कोचर का कहना है कि देश का टेलीकॉम सेक्टर कर्ज के भारी बोझ से दबा है. इसके बावजूद भारत दुनिया में सबसे तेजी से 5जी रोलआउट करना वाला देश है.
जियो और एयरटेल ने किया जमकर निवेश
रिलायंस जियो देश में 400 से ज्यादा और एयरटेल 500 से ज्यादा शहरों में 5जी सर्विस शुरू कर चुके हैं. जियो ने 5जी सर्विस के लिए 88,078 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम खरीदा है, जबकि एयरटेल ने स्पेक्ट्रम पर 43,084 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. वोडाफोन आइडिया ने भी 18,799 करोड़ रुपये का 5जी स्पेक्ट्रम खरीदा है, लेकिन अब तक अपने 5जी प्लान की डिटेल शेयर नहीं की है.

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